Friday, 9 November 2018

A real Hostel story will shock you!

A real Hostel story will shock you!


ये कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है इसमें प्रयोग किये गए जगहों और व्यत्किगत नामो को बदल दिया गया है, इस कहानी का किसी की भी भावना को किसी भी तरह से ठेस पहुंचाने का कोई भी उद्देश्य नहीं है..




A Hostel story will shock you!




                      

ये कहानी है उन चार दोस्तों की जो बचपन से एक दूसरे के साथ रहे एक दूसरे के साथ अपना बचपन गुजारा और एक ही स्कूल में साथ पढ़े बड़े हुए..

रोहित, सौरभ, कुनाल, और सुभम ये चारो नरसिंगपुर के रहने वाले थे ये चारो जहा भी जाते हमेसा एक साथ ही रहते, चारो ने अपना बचपन एक साथ एक ही स्कूल में गुजारा था, इनकी दोस्ती की मिसाल सारा स्कूल दिया करता था.


 स्कूल लाइफ 



इन चारो की दोस्ती एक ही स्कूल से साथ में हुई थी चारो पढाई लिखाई में बहुत ही होशियार थे, और मस्ती करने  में भी, इनका कोई भी ऐसा दिन नहीं बीतता था की ये लोग अपने स्कूल में अपने टीचर को परेशान न करे, हलाकि चारो होशियार जरूर थे पर इनकी होशियारी की वजह थी इन चारो की दोस्ती और इनकी एकता क्योकि अगर कोई एक किसी प्रॉब्लम में आता तो दूसरा उनको उस प्रॉब्लम से बाहर निकाल लिया करता था.


ये चारो यू तो हमेशा मस्ती मजाक किया करते थे पर जब बात एग्जाम की आती थी तब ये चारो एग्जाम के 3 महीने पहले से ही अपनी मेहनत में लग जाया करते थे, देखते ही देखते इनकी दसवीं की एग्जाम निकल गयी जिसमे ु चारो ने बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया,


अब बारी थी ग्यारहवीं की जिसमे उन्हें अपना सब्जेक्ट चुनना था तो उन्होंने एक साथ ही साइंस सब्जेक्ट चुना जिसमे उन चारो को बहुत इंटरेस्ट था, चारो ने अपने भविष्य के लिए यही प्लान करके रखा था की चारो एक साथ जहा भी जायगे जों भी करंगे एक साथ ही करेंगे और उन्होंने यही किया,,देखते ही देखते उनकी बारहवीं क्लास आ गयी और उन्होंने अपनी मेहनत जारी राखी अब उनकी मस्ती मजाक की आदत बहुत हदतक काम हो चुकी थी क्योकि अब वो अपने भविष्य के लिए सीरियस हो चुके थे,



अगर हम बात करे की इन चारो में सबसे ज्यादा होशियार और समझदार कौन था तो वो था  कुनाल


कुनाल पढाई में इनमे से सबसे ज्यादा  तेज़ था और सिर्फ पढाई में नहीं बल्कि हर चीज में वो आगे था उसको पता था की ये जिंदगी कैसे जीना है किस हद तक मस्ती और किस हद तक पढाई करनी है वो दुनिया दारी की समझ बहुत अच्छे से रखता था और लोगो से हमेशा प्यार मोहब्बत से ही पेश आता था, अगर रोहित, सौरभ, और सुभम  को किसी सब्जेक्ट में या प्रश्न में कोई प्रॉब्लम आती तो ये तीनो कुनाल के पास ही जाते थे और उनकी प्रॉब्लम को कुनाल आसानी से इनको समझा दिया करता था.


देखते ही देखते इनका स्कूल ख़त्म हो गया और अब बारी थी इनको कॉलेज ढूंढ़ने की...



तीनो ने मिलकर सोचा की हम engineering  की पढाई करते है और उसके लिए उन्होंने गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए नेशनल लेवल पर होने वाले एंट्रेंस एग्जाम की तैयारियां शुरू कर दी  हलाकि वो ये बात जानते थे की उनको एक ही कॉलेज मिले ये कोई जरुरी नहीं है, क्योकि कॉलेज उनके मार्क्स के अकॉर्डिंग मिलेंगे और किसका सिलेक्शन होता है किसका नहीं ये भी उनको पता नहीं था,


तो चारो ने अपनी जी तोड़ मेहनत करी और गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए एंट्रेंस एग्जाम को दिया।।




अब वो दिन भी करीब आ गया था  जिसका इंतजार इन चारो को था,, और वही हुआ जो इतने सालो से होता आ रहा था क्योकि रोहित, सौरभ और शुभम जनरल श्रेणी से आते थे इस कारण इनका सिलेक्शन एग्जाम में कुछ मार्क्स से रह गया कुनाल जो Obc से था इसका सिलेक्शन हो चूका था पर कुनाल के मार्क्स इसके केटेगरी के कटऑफ से दुगने भी थे,


अब इन चारो को कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या करे क्या नहीं , फिर कुनाल को उसके दोस्तों ने कॉलेज ज्वाइन करने की सलाह दी जो उसे उसकी मेहनत से मिला था,पर कुनाल  ने उनकी सलाह को मना करते हुए ये decide किया की वो चारो अब अच्छे प्राइवेट कॉलेज से ही engineering करेंगे पर साथ करेंगे, कुनाल ने अपने दोस्तों का प्रॉमिस याद दिलाया की स्कूल में कैसे उन चारो ने एक साथ रहने का वादा किया था,




कुनाल ने अपने दोस्तों के लिए गवर्नमेंट कॉलेज को नामंजूर करते हुए एक अच्छे प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन की तलाश में जुट गया,जहा उन चारो का एडमिशन हो सके, फिर उन चारो को उनके एंट्रेंस के मार्क्स के अनुसार एक इंजीनियरिंग कॉलेज मिला जो भोपाल में था और तीनो ने अपना वेरिफिकेशन कराने के लिए भोपाल चले गए।





कुछ ही दिनों में उन चारो ने अपने कॉलेज की सारी तैयारियां कर ली और वो बहुत खुश थे की वो अब फिर से एक दूसरे के साथ है.




हॉस्टल लाइफ 




A Hostel story will shock you!





भोपाल में उन्होंने एक हॉस्टल में रहना शुरू कर दिया , चारो बहुत खुश थे वो साथ में कॉलेज जाते फिर कॉलेज से हॉस्टल आते फिर रात में बाइक लेके वो लोग घूमने निकल जाते, उनका कॉलेज का पहला दिन भी काफी अच्छा रहा स्कूल की ही तरह वो लोग कॉलेज भी डेली जाते और हमेशा कुछ न कुछ नया सिखके हॉस्टल में बाते करते और मस्ती करते,


इनमे से कोई सबसे ज्यादा खुश रहता था तो वो था कुनाल



कुनाल की आदत थी जब भी वो हॉस्टल के अपने रूम से बहर निकलता तो अपनी बोतल हाथ में लेके मेस वाले सुरेश भैया से मिलता पूछता की आज क्या बना रहे हो ? और मजाक मजाक में उनकी उडाता की कल का खाना बकवास बनाया था हॉस्टल के लड़के बता रहे थे !!

सुरेश भैया के बहुत पूछने के बाद कुनाल बताता की " नहीं भैया रे में तो मजाक कर रहा था तुम फालतू पगला रहे हो! "
ऐसी कुनाल की मस्ती मेस वाले भैया के साथ साथ हॉस्टल के मालिक शर्मा जी से भी चलती थी,,

जब भी ये चारो अपने कॉलेज जाते तो नीचे ऑफिस में अपने हॉस्टल के मालिक शर्मा जी से कुनाल मिलके जाता और जब भी शर्मा जी उसको पैसे के लिए कुनाल को बोलते की तुम्हरा रेंट नहीं आया है अभी तक तो कुनाल मजाक में बोलता था " क्या करोगे आप इतने पैसे जब देखो बस पैसे पैसे करते हो ,नहीं देना इस महीने के तो भूल ही जाओ "  और शर्मा जी हस्ते हुए उसको बोलते की " बेटा आना नहीं हॉस्टल " और कुनाल जाते हुए बोलता जाता की   " शर्मा जी हाथ पकड़कर भी निकालोगे तो भी नहीं जाउगा इस हॉस्टल से. "

कुनाल को  वो हॉस्टल बहुत पसंद आया था वहा का रहन सहन मस्ती मजाक मेस वाले सुरेश भैया हो या शर्मा जी हो.. वो सबसे बहुत जुड़ चूका था और उसके इस ब्योहार को देखकर उससे भी सारा हॉस्टल जुड़ गया था

कुनाल ने अपने पिता को भी भोपाल घुमाया और हॉस्टल दिखाकर शर्मा जी से से मिलवाया

ऐसे ही सब चलता रहा और २ साल निकल गए, और उसका प्यार उसके हॉस्टल से और ज्यादा गहरा हो गया था , तीज त्यौहार होने पर कुनाल के दोस्त अपने घर जाते पर कुनाल ने अपने घर भी ज्यादा जाना कम कर दिया था , जब कुनाल अपने घर जाता तो वहा अपने हॉस्टल के बारे में ही बताता रहता की कौन क्या है कैसा है, और सबकुछ और 1 हफ्ते के अंदर ही वापस अपने घर से अपने हॉस्टल आ जाता था और फिर उसके दोस्तों को भी उसके साथ भोपाल आना पड़ जाता था


उसके सभी दोस्त जानते थे की इसका घर में मन नहीं लगता अब बस हॉस्टल ही हॉस्टल और भोपाल ही दिखता  है, और इसके लिए उसके दोस्त उसका कभी कभी मजाक भी बनाते थे.

यही सब मौज मस्ती में पढाई लिखाई, कॉलेज के चलते चलते देखते ही देखते दिन बीतते गए..






एक दिन ऐसा हुआ की कुनाल को उसके घर से एक कॉल आया जिसमे उसके पिता जी ने उसे बताया की उनका ट्रांसफर सागर हो गया है और कुनाल उनकी इकलोती संतान थी तो इसी के चलते उन्होंने उससे कहा की कुछ दिन के लिए वो घर आ जाये और सब मिलके बात करेंगे और घर के कुछ जरुरी बातें बताना चाहते थे,


कुनाल को ट्रांसफर की बात सुनकर दुःख हुआ और उसको मजबूरन हॉस्टल छोड़कर घर के लिए आना ही था वो हॉस्टल और अपना कॉलेज का सोच रहा था की क्या करू क्या नहीं ,? पर फिर वो मजबूरी में हॉस्टल से घर आने की तैयारियां करने लगा वो अपना बैग जमा रहा था, और उसने रात में ही घर के लिए निकलने का फैसला किया,


रोहित, सौरभ और सुभम कुनाल का बैग जमा रहे थे ,और उसे समझा रहे थे  रोहित ने कहा की " अब ज्यादा पगला मत ट्रांसफर से क्या होता है आराम से जा तू मेरे पापा का तो 3 बार ट्रांसफर हो चुका है "

सुभम ने भी उसे बोला की " कॉलेज की टेंशन मत ले हम देख लेंगे बस तू आराम से जा और यहाँ की टेंशन मत लेना कुछ दिन में तो आ ही जायगा "


कुनाल जाते हुए अपने मेस वाले सुरेश भैया से मिला और बोला " भैया में आता हु कुछ दिन में आप रोना नहीं मेरी याद में, भैया हसे और बोले " हाओ आराम से जाना,"

फिर शर्मा जी से मिला तो शर्मा जी ने बोला कहा जा रहा है हीरो ! कुनाल ने बोला की " घर जा रहा हु शर्मा जी  काम से और मै अभी गया और अभी आया हॉस्टल से दूर सांस भी लेने में तकलीफ होती है मेको आप सब का प्यार मेको खींचकर ले ही आता है " इतना कहकर वो निकल पड़ा,


इसके बाद कुनाल बस से अपने घर नरसिंगपुर के लिए रवाना हो गया..


उसके दो दिन बाद ही कुनाल सुबह वापस हॉस्टल में आ गया और दोस्तों ने पूछा की बिना कॉल किये बताये कैसे आ गया और तू तो एक हफ्ते बाद ही आने वाला था न,उसने बस इतना बोला " मेरी मर्जी  आ गया "

उसके दोस्त उससे कुछ पूछ पाते वो बोला में थक गया हु सोऊंगा अब ,, उसके दोस्तों ने बोला ठीक है तू आराम कर हम कॉलेज जा रहे है आके बात करते है,,

फिर रोहित ,सोरभ और शुभम कॉलेज से वापस आये तो देखा की कुनाल अभी तक बिस्तर पर ही सो रहा ही उन्होंने उससे पूछा की ज्यादा थक गया है क्या?
क्या हुआ तबियत ठीक है न ?
घर में सब ठीक है न ?

पर कुनाल ने बिना रजाई हटाए उनसे सिर्फ इतना बोला की हाँ सब ठीक है ,और कुछ नहीं बोला, उन्हें थोड़ा अजीव लगा पर उन्होंने उतना ध्यान नहीं दिया।
फिर उसके दोस्तों ने शाम को रात में उससे पूछा की कुनाल चल आते है घूमके उठ जा पर कुणाल ने उस पर कोई जवाब नहीं दिया,, जब उन तीनो ने साथ आकर उससे दुबारा पूछा तो उसने जाने के लिए मना कर दिया और बोला " तुम लोग जाओ "

उसके दोस्तों को फिर अजीव लगा  और उन्होंने पूछा की क्या हो गया है तुमको जब से आया है न बात कर रहा है न कुछ ? हुआ क्या तेरे को...

कुणाल ने दोबारा बोला " तुम लोग जाओ मेरा मन नहीं है कही जाने का "

इसके बाद वो लोग निकल गए,


कुणाल उनके जाने के बाद खड़ा हुआ और मेस में गया सुरेश वही खड़ा था और कुनाल ने उसको नजरअंदाज करके एक थाली निकाली और एक रोटी और सब्जी लेके चुपचाप किनारे बैठकर बिना किसी से बात किये खाने लगा , मेस वाले सुरेश भैया को ये बात बहुत अजीव लगी की ये लड़का कभी ऐसा नहीं हुआ की मुझसे बात न किया हो और आज अचानक इसको क्या हो गया ?? उन्होंने आंगे होकर उससे पूछा कुनाल तुम तो घर से 1 हफ्ते बाद आने वाले थे न तो दो दिन में ही कैसे आ गये?

कुनाल अचानक रुका और बोला की हाँ मेरी मर्जी आ गया , इतना बोलकर उसने थाली रख दी, और अपने रूम पर चला गया.. सुरेश ने थाली देखी तो उसने पाया की उसने सब्जी को हाथ भी नहीं लगाया था और रोटी खा लिया था !! सुरेश को उसकी ये हरकत अजीव लगी फिर वो अपने काम में वापस लग गया.


उसके दोस्त वापस आये और देखा की कुणाल बिस्तर पर अभी भी लेता हुआ है उन्होंने उससे खाने का पूछा तो उसने कहा उसने खा लिया है..

ऐसे ही वो रात निकल गयी सुबह सब उठे और सबने देखा की कुनाल अपने बेड में नहीं है, उन लोगो ने उसे कॉल किया पर कॉल लगा नहीं , और उसके दोस्त कॉलेज चले गए, कॉलेज से वापस आने के बाद उसके दोस्तों ने देखा की कुनाल अपने बेड में ही है तो उससे पूछे की कहा था तू  क्या हो गया है तेरे को ?
कुछ बता भी नहीं रहा है,?
उसने बोला कुछ नहीं हुआ मै थक गया हु तो आराम कर रहा हु बस, उसके हॉस्टल के दोस्तों ने भी बताया की कुनाल  को क्या हो गया है किसी से बात नहीं करता न देखता सुरेश भैया भी बता रहे थे की कोई दिक्कत है क्या कुणाल को, ?? किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था की कुनाल ऐसा क्यों कर रहा है,

सबके जाने के बाद कुणाल उठता और दोपहर में हॉस्टल से पता नहीं कहा चला जाता,, शर्मा जी ने पूछा की कुणाल इतने जल्दी कैसे आ गया तो उनकी बातो को नजरअंदाज करके वो बाहर निकल गया, (शर्मा जी उस दिन सुबह कुछ काम से आये थे)

शर्मा जी को उसकी ये हरकत अजीव लगी की जो लड़का खुद आगे होकर उनको हमेशा छेड़ा करता था आज अचानक उसको क्या हो गया ??

कुणाल लोगो को नजरअंदाज करके सुबह सबके उठने के पहले 4 बजे तक उठकर कही चला जाया करता था और सीधा लोगो के सोने के वक़्त ही आया करता था उसके दोस्तों को कुछ समझ नहीं आ रहा था की इसको हुआ क्या है ?

शर्मा जी सुरेश और उसके दोस्तों से पूछे की कुनाल की तबियत ठीक है न आज कल रुखा रुखा क्यों रह रहा है , दिखता भी नहीं ज्यादा ये लड़का ? सबने एक ही बात बोली की हमे खुद कुछ समझ नहीं आ रहा की इसको हुआ क्या है??

ना ठीक से बात करता ??
ना कुछ ठीक से खाना खाता ?
न कॉलेज जा रहा है?
न ही अभी तक अपने कपडे बदले ?


किसी को कुछ समझ आ नहीं रहा था और उससे पूछने का वक़्त भी नहीं था क्योकि वो सुबह निकल जाता और सीधा उस वक़्त आता जब सबका सोने का वक़्त होता



ऐसे ही करते करते 6 दिन बीत गए और एक दिन सुबह सुबह उनके रूम में एक लड़का आया और बोलै की कुणाल कहा है उन्होंने देखा की कुणाल अपने बेड में नहीं था तो कुणाल के दोस्तों ने पूछा की क्या हुआ ? तो उस लड़के ने बोला की कुणाल आपके साथ रहता है ? उन्होंने बोला हाँ तो उसने बोला आप लोगो को शर्मा जी बुला रहे है..


उनको कुछ समझ नहीं आया और वो लोग उठे और शर्मा जी के ऑफिस जाने  लगे,, जैसे वो अंदर गए उन्होंने देखा की कुनाल के पिता और माँ ऑफिस में चुपचाप दरवाजे की तरफ देख रहे थे जैसे वो अंदर गए तो उनको कुछ समझ नहीं आ रहा था और शर्मा जी भी खड़े थे और सुरेश भी,, कुणाल के दोस्तों ने बोला की क्या हुआ अंकल जी आप लोग यहाँ कैसे सब ठीक है न ? कुणाल ने बताया नहीं की आप लोग आ रहे हो ??


इतना सुनते ही कुणाल की माँ ने रोना शुरू कर दिया और अंकल जी की भी आँखों से आँसू निकलने लगे। .!!


उन लोगो की कुछ समझ में नहीं आ रहा था की ये रो क्यों रहे है हो क्या रहा है ?

इसके बाद अंकल ने उनको बताया की बेटा कुणाल जब घर आ रहा था तब उसकी बस कुछ देर के लिए  एक ढाबे में रुकी थी वह रोड क्रॉस करते वक़्त एक कार ने उसको टक्कड़ मार दी और मेरा कुणाल हमको छोड़ कर चला गया ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हम उसका सामान लेने के लिए आये है. ... ... .. ... ... ... ..



इतना सुनते ही उसके दोस्तों के पेरो से जमीन खिसक गयी वो लोग एक दूसरे का चेहरा देख रहे थे,,,, सुरेश शर्मा जी और कुणाल के दोस्तों को कुछ समझ नहीं आ रहा था की ये कैसे हो सकता है कुणाल तो उनके साथ 5 दिन से साथ में है ... वो लोग काफी डर गए थे ,, उनके मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी!!





उसके दोस्तों ने अंकल और कुनाल की माँ को सबकुछ बताया की 6 दिन से कैसे वो उनके साथ रह रहा है ?
उसकी आजीव हरकतो के बारे में ?

उसके माता पिता को उनकी बातो पर विस्वास नहीं हुआ क्योकि जिसका अंतिम संस्कार वो करके आये थे वो यहाँ कैसे आ सकता है ?? किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था इसी बीच सुभम ने बोला की कुणाल शाम को हॉस्टल आता है आप लोग देखना। . ...


पर उस दिन रात में कुनाल वापस नहीं आया और उसको फिर किसी ने कभी नहीं देखा!!!



उसके माता पिता, शर्मा जी, सुरेश और उसके दोस्त सभी अपने रूम पर गए और उसके बेड को देखा ठीक से तलाशी ली तो देखा की बेड में सिर्फ एक " रोटी ' थी जो सूख चुकी थी !! और उनको अभी भी कुछ समझ नहीं आ रहा था की कुणाल उनके साथ कैसे आ सकता है ,हमारे सामने चलता था जाता था ? चल क्या रहा था ? ये सब ???

सुरेश ने , शर्मा जी ने , उसके दोस्तों ने देखा आखिर ये कैसे संभव था की कोई मारा हुआ इंसान वापस जिन्दा हो जाए या वो उसकी आत्मा थी जो उनके सामने आ रही थी...






उस दिन शर्मा जी ने सबसे एक बात कही की  " कुनाल सही था..!! उसने कहा था की वो ये हॉस्टल को छोड़कर नहीं जायगा, जल्दी आ जायगा। ..!! और उसने ऐसा ही किया,,, वो वापस आया था, अपना वादा निभाने,,,,,,,,,,,,,











कुदरत का यह नियम है की किसी की आखिरी ख्वाइश कोई टाल नहीं सकता, भगवान् भी नहीं!!!









तो दोस्तों आपको अगर ये सच्ची कहानी पसंद आयी हो तो कमेंट करके जरूर बताये और अपने फ्रेंड्स के साथ भी जरूर शेयर करे! ताकि में ऐसी और भी सच्ची और रोचक कहानिया आपके लिए लेके आउ..










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