SECRETS OF RAMAYAN-रामायण से जुड़े कुछ रहस्य

SECRETS OF RAMAYAN-रामायण से जुड़े कुछ रहस्य




Secrets of Ramayan रामायण से जुड़े कुछ रहस्य

   SECRETS OF RAMAYAN-रामायण से जुड़े कुछ रहस्य



तो मेरे प्यारे दोस्तों बहुत ही कम लोग जानते हैं कि श्री रामचरित्रमानस और रामायण में कुछ कुछ बातें बिल्कुल अलग-अलग हैं। जबकि कुछ बातें ऐसी है जिनका वर्णन केवल बाल्मीकि कृत रामायण में ही ही लिखी गई है। दोस्तों भगवान श्रीराम को समर्पित मुख्यता दो ग्रंथ लिखे गए हैं। एक तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरित्रमानस और दूसरी बाल्मीकि कृत रामायण। इनके अलावा भी कुछ अन्य ग्रंथ भगवान राम पर लिखे  गए हैं।
लेकिन इन सभी ग्रंथों में बाल्मीकि कृत रामायण को सबसे सटीक और प्रमाणिक माना जाता है।

तो आज हम बात करेंगे रामायण से जुड़े कुछ ऐसे बातो की जो सभी लोग नहीं जानते तो चलिए शुरू करते है... 

SECRETS OF RAMAYAN



Secrets of Ramayan रामायण से जुड़े कुछ रहस्य
श्री राम 


1:-  महाकवि तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरित्रमानस में यह वर्णन मिलता है कि भगवान श्रीराम ने सीता से विवाह करने के लिए उनके स्वयंवर में शिव धनुष को उठाया और उसका प्रत्यंचा चढाने लगे तो प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह शिव धनुष टूट गया। जबकि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में सीता स्वयंवर का कोई वर्णन ही नहीं है। बाल्मीकि कृत रामायण के अनुसार भगवान राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिला पहुंचे थे। और विश्वामित्र के ही कहने पर राजा जनक ने प्रभु श्री राम को वह शिव धनुष दिखाया था। जब प्रभु श्रीराम ने वह शिव धनुष देखा तो खेल ही खेल में प्रभु श्रीराम ने उस शिव धनुष को उठा लिया और धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। चुकी राजा जनक ने यह प्रण किया था, कि जो भी इस शिव धनुष को उठा लेगा उसी से वे अपनी पुत्री सीता का विवाह कर देंगे।तो इसलिए राजा जनक ने अपनी अपनी पुत्री सीता का विवाह भगवान श्रीराम से कर दिया।
2:- वाल्मीकि कृत रामायण के अनुसार राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया था। और इस यज्ञ को मुख्य रूप से ऋषि ऋष्यश्रृंग ने संपन्न किया था। ऋषि ऋष्यश्रृंग महर्षि विभांडक के पुत्र थे। एक दिन जब महर्षि विभांडक नदी में स्नान कर रहे थे। तब विभांडक ऋषि का नदी में वीर्यपात हो गया। उस जल को एक हर हिरनी ने पी लिया था।  जिसके फलस्वरु ऋषि ऋष्यश्रृंग का जन्म हुआ था।
3:- हम सभी जानते हैं कि लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा के नाक कान काटे जाने से क्रोधित होकर लंकापति रावण ने माता सीता का हरण किया था। लेकिन आप में से बहुत ही कम लोग जानते होंगे स्वयं शूर्पणखा ने भी लंकापति रावण को सर्वनाश होने का श्राप दिया था। क्योंकि रावण की बहन शूर्पणखा के पति का नाम विद्युतजिव्ह था। और वह कालकेय राजा का सेनापति था। रावण जब विश्वविजय पर निकला था तब उसे राजा कालकेय से युद्ध हुआ था। तब उसने उस युद्ध में अपने बहन के पति विद्युतजिव्ह को मार दिया। तब  रावण की बहन शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को श्राप दिया की एक दिन मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा।
4:- रावण जब विश्वविजय करने के लिए स्वर्ग लोक पहुंचा तो उसे रंभा नाम की अप्सरा दिखाई दी। जिसे देखकर रावण उस पर मोहित हो गया और अपनी वासना पूरी करने के लिए रावण ने रंभा को पकड़ लिया। तब उस रंभा नाम की अप्सरा ने रावण से कहा कि आप मुझे इस तरह से स्पर्श नहीं कीजिए क्योंकि मैं आपके बड़े भाई कुबेर के बेटे नलकुबेर के लिए आरक्षित हूं। इसलिए मैं आपकी पुत्रबधू के समान हूं। लेकिन रावण ने उसकी बात नहीं माना और उसने रंभा के साथ दुराचार किया। यह बात जब नलकुबेर को पता चली तो उन्होंने रावण को एक श्राप दे दिया। उन्होंने रावण को श्राप दिया कि आज के बाद रावण बिना किसी स्त्री की इच्छा के उसे स्पर्श करेगा तो उसके सर के सौ टुकड़े हो जाएंगे।
5:- बाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार रावण जब अपने पुष्पक विमान से कहीं जा रहा था। तभी उसे एक सुंदर युवती दिखाई दी। उसका नाम वेदवती था। और वो भगवान श्री हरि विष्णु का तपस्या कर रही थी क्योंकि वह भगवान विष्णु को अपने पति रुप में पाना चाहती थी। रावण ने जब वेदवती को देखा तो वह उस पर मोहित हो गया। और वह वेदवती के बाल खींचकर उसे अपने साथ चलने के लिए कहा तब उस तपस्विनी ने उसी क्षण अपने शरीर का त्याग कर दिया। और रावण को श्राप दे दिया कि एक स्त्री के कारण ही तेरी मृत्यु होगी। उसी स्त्री ने दूसरे जन्म में सीता के रूप में अवतार जन्म लिया।
6:- तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित्र मानस के अनुसार सीता स्वयंवर के समय भगवान परशुराम वहां आए थे। जबकि बाल्मीकि कृत रामायण के अनुसार सीता से विवाह के बाद जब प्रभु श्री राम अयोध्या लौट रहे थे। तब भगवान परशुराम आए थे। उन्होंने भगवान श्रीराम को अपने धनुष पर बाण चढ़ाने के लिए कहा। जब भगवान श्रीराम ने उनके धनुष पर बाण चढ़ा दिया तो परशुराम जी वहां से चले गए।
7:- बाल्मीकि रामायण के अनुसार जिस समय भगवान श्री राम वनवास गए थे। उस समय उनकी आयु 27 वर्ष की थी। भगवान राम के पिता राजा दशरथ श्रीराम को वनवाश नहीं भेजना चाहते थे। लेकिन वे अपनी पत्नी के आगे वचनबद्ध थे। दोस्तों श्री राम के पिता राजा दशरथ को जब भगवान श्रीराम को वनवास जाने से रोकने की कोई उपाय नहीं सूझा। तो उन्होंने श्रीराम से यह भी कह दिया कि तुम मुझे बंदी बनाकर स्वयं अयोध्या का राजा बन जाओ।
8:- श्री राम के भाई भरत को अपने पिता राजा दशरथ की मृत्यु की आभास पहले ही एक सपने के माध्यम से हो गया था। स्वप्न में भारत ने अपने पिता राजा दशरथ को काले वस्त्र पहने हुए देखा था। और उनके ऊपर पीले रंग की स्त्रियां प्रहार कर रही थी। भरत के सपने में राजा दशरथ लाल रंग के फूलों की माला पहने और लाल चंदन लगाए गधे जूते हुए रथ पर बैठकर तेजी से दक्षिण (यम की दिशा) की ओर जा रहे थे।
9:- रघुवंश में एक समय अनरण्य नाम के एक परम प्रतापी राजा हुए थे। जब लंकापति रावण विश्वविजय करने के लिए निकला था। तब उस का युद्ध राजा अनरण्य के साथ भी हुआ था। और उस युद्ध में राजा अनरण्य की मृत्यु हो गई थी। लेकिन मरने से पहले राजा अनरण्य ने लंकापति रावण को श्राप दिया कि मेरे ही वंश में उत्पन्न एक युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा।
10:- हिंदू धर्म के अनुसार 33 करोड़ देवी देवताओं की मान्यता है। जबकि वाल्मीकि द्वारा लिखी गयी  रामायण के अरण्यकांड के चौदहवे सर्ग के चौदहवे श्लोक में सिर्फ 33 देवता ही बताए गए हैं। रामायण के श्लोक के अनुसार वह है:-12 आदित्य,आठ वसु,11 रुद्र और दो अश्विनी कुमार। यह ही कुल 33 देवता हैं।
11:- रावण जब विश्वविजय पर निकला था तो वह यमलोक भी जा पहुंचा था। वहां पर यमराज और रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ था। और युद्ध के दौरान जब यमराज ने रावण के प्राण लेने के लिए कालदंड का प्रयोग करना चाहा, तो ब्रह्मा जी ने वहां आकर उन्हें ऐसा करने से रोक दिया क्योंकि रावण का किसी भी देवता के द्वारा वद्ध  संभव नहीं था।
12:- लंकापति रावण जब सीता का हरण कर रहा था। उसी समय जटायु नानक गिद्ध ने रावण को रोकने का बहुत प्रयास किया था। बाल्मीकि रामायण के अनुसार जटायु के पिता का नाम अरुण था। यह अरुण ही भगवान सूर्यदेव के रथ के सारथी हैं।
13:– जिस रात रावण सीता का हरण करके लंका के अशोक वाटिका में लेकर गया। उसी रात ब्रह्मा जी के कहने पर देवराज इंद्र सीता जी के लिए एक विशेष प्रकार की खीर लेकर आए। पहले देवराज इंद्र ने अशोक वाटिका की सारे पहरेदारों को सुला दिया। और उसके बाद सीता जी को वह खीर अर्पित की। उस खीर को खाने के बाद सीता जी की भूख-प्यास शांत हो गई।
14:- जब राम और लक्ष्मण सीता जी की खोज वन में कर रहे थे। उस समय कबंध नामक राक्षस का वध राम-लक्ष्मण ने किया था। वास्तव में कबंध राक्षस एक श्राप के कारण राक्षस बना था ।जब श्रीराम ने उसके शरीर को अग्नि के हवाले किया तो कबंध राक्षस का श्राप टूट गया,और वह मुक्त हो गया। कबंध राक्षस ने ही भगवान श्रीराम को सुग्रीव से मित्रता करने के लिए कहा था।
15:- तुलसीदास रचित रामचरित्र मानस के अनुसार समुद्र ने लंका जाने के लिए श्रीराम को रास्ता नहीं दिया तो लक्ष्मण बहुत ही ज्यादा क्रोधित हो गए थे। जबकि बाल्मीकि रामायण के अनुसार लक्ष्मण नहीं बल्कि भगवान श्रीराम समुद्र पर क्रोधित हुए थे। और उन्होंने समुद्र को सुखा देने वाले बाण भी समुद्र पर छोड़ दिए थे। तब लक्ष्मण व अन्य लोगों ने भगवान राम को समझाया था।
16:- तुलसीदास कृत रामायण के अनुसार समुद्र पर पुल का  निर्माण नल और नील नामक दो वानरों ने किया था। क्योंकि नल और नील को यह श्राप मिला था कि उनके द्वारा पानी में फेंकी गई वस्तु पानी में डूबेगी नहीं। जबकि बाल्मीकि रामायण के अनुसार नल देवताओं के शिल्पी (इंजीनियर) विश्वकर्मा के पुत्र थे। और वह स्वयं भी शिल्प कला में बहुत निपुण थे। अपनी इसी कला के मदद से उन्होंने समुद्र पर सेतु का निर्माण किया था।
17:- बाल्मीकि रामायण के अनुसार समुद्र पर सेतु बनाने में 5 दिन का समय लगा था। पहले दिन वानरों ने 14 योजन,दूसरे दिन 20 योजन,तीसरे दिन 21 योजन,चौथे दिन 22 योजन,और 5 में दिन 23 योजन पुल का निर्माण किया था। इस तरह कुल 100 योजन लंबाई वाला सेतु समुद्र पर बनाया गया था। वह सेतु 10 योजन चौड़ा था.(एक योजन लगभग 13-16 किमी होता है)।
18:- एक बार रावण जब भगवान शिव से मिलने कैलाश गया था तो वहां उसने नंदी जी को देखकर उनके स्वरूप की हंसी उड़ाई थी। रावण ने नंदी को बंदर के मुख वाला कहा था। तब नंदी जी ने रावण को श्राप दिया कि एक दिन बंदरों के कारण ही तेरा सर्वनाश होगा।
19:- बाल्मीकि रामायण के अनुसार जब रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कैलाश पर्वत को ऊपर उठा लिया था।  यह देख कर माता पार्वती रावण पर क्रोधित हो गई। और उन्होंने रावण को श्राप दे दिया कि तेरी मृत्यु एक दिन किसी स्त्री के कारण ही होगी।
20:- जिस समय भगवान श्री राम और रावण के बीच अंतिम युद्ध चल रहा था उस समय देवराज इंद्र ने अपना दिव्य रथ श्री राम के लिए भेजा था। उस रथ पर बैठकर ही भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था।






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