क्यों मनाया जाता है करवा चौथ ? करवा चौथ पूजा विशेष इन बातो का रखे ख्याल

क्यों मनाया जाता है करवा चौथ ? करवा चौथ पूजा विशेष इन बातो का रखे ख्याल

क्यों मनाया जाता है करवा चौथ ?

क्यों मनाया जाता है करवा चौथ ?
करवा चौथ 

किवदंति के अनुसार जब सत्यवान की आत्मा को लेने के लिए यमराज आए तो पतिव्रता सावित्री ने उनसे अपने पति सत्यवान के प्राणों की भीख मांगी और अपने सुहाग को न ले जाने के लिए निवेदन किया। यमराज के न मानने पर सावित्री ने अन्न-जल का त्याग दिया। वो अपने पति के शरीर के पास विलाप करने लगीं। पतिव्रता स्त्री के इस विलाप से यमराज विचलित हो गए, उन्होंने सावित्री से कहा कि अपने पति सत्यवान के जीवन के अतिरिक्त कोई और वर मांग लो।

सावित्री ने यमराज से कहा कि आप मुझे कई संतानों की मां बनने का वर दें, जिसे यमराज ने हां कह दिया। पतिव्रता स्त्री होने के नाते सत्यवान के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष के बारे में सोचना भी सावित्री के लिए संभव नहीं था। अंत में अपने वचन में बंधने के कारण एक पतिव्रता स्त्री के सुहाग को यमराज लेकर नहीं जा सके और सत्यवान के जीवन को सावित्री को सौंप दिया। कहा जाता है कि तब से स्त्रियां अन्न-जल का त्यागकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए करवाचौथ का व्रत रखती हैं।

द्रौपदी द्वारा भी करवाचौथ का व्रत रखने की कहानी प्रचलित है। कहते हैं कि जब अर्जुन नीलगिरी की पहाड़ियों में घोर तपस्या लिए गए हुए थे तो बाकी चारों पांडवों को पीछे से अनेक गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। द्रौपदी ने श्रीकृष्ण से मिलकर अपना दुख बताया। और अपने पतियों के मान-सम्मान की रक्षा के लिए कोई उपाय पूछा। श्रीकृष्ण भगवान ने द्रोपदी को करवाचौथ व्रत रखने की सलाह दी थी, जिसे करने से अर्जुन भी सकुशल लौट आए और बाकी पांडवों के सम्मान की भी रक्षा हो सकी थी.



करवा चौथ पूजा विशेष; इन बातो का रखे ख्याल 




करवा चौथ जिसे संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है। 'करवा चौथ' जिसका सभी विवाहित स्त्रियां साल भर इंतजार करती हैं और इसकी सभी विधियों को बड़े श्रद्धा-भाव से पूरा करती हैं। करवाचौथ का त्योहार पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। कार्तिक मास की चतुर्थी जिस रात रहती है उसी दिन करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 27 अक्टूबर को किया जाएगा।

करवा चौथ पूजा विशेष; इन बातो का रखे ख्याल
करवा चौथ 


 इस दौरान आपको इन बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए




  • पूजा की सामग्री एक थाली में पहले से तैयार रखें।
  • छलनी: इसीके जरिए व्रती महिलाएं चांद देखती है। फिर इसके बाद इसीके जरिए अपने पति का चेहरा देखना होता है।
  • सरगी: करवा चौथ के दिन सरगी का भी विशेष महत्‍व है। सरगी में सूखे मेवे, नारियल, फल और मिठाई खाई जाती है। अगर सास नहीं है तो घर का कोई बड़ा भी अपनी बहू के लिए सरगी बना सकता है।
  • करवा: इस व्रत में इसका भी काफी महत्व होता है। पूजा के दौरान करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें। करवा में गेहूं और ढक्‍कन में शक्‍कर का बूरा भर दें। 
  •  लड़की की मां की तरफ से लड़की के ससुराल भेजे जाने वाली सामान होता हैं।  इसमें पैसे, कपड़े, मिठाई और फल के साथ गहने भी होते हैं जो करवाचौथ की पूजा पर महिलाएं पहनती हैं। दरअसल इसमें दुल्हन के कपडे़ और श्रंगार का सामान होता है जिसे महिलाएं पहनती है। 
  • .सिंदूर या कुमकुम: महिलाओं के लिए लाल टीका लगाना जरूरी होता है।
  • लाल मौली जिसे कलावा भी कहते हैं, वह भी आपके पास जरुर होना चाहिए।
  • चढ़ावा के लिए कुछ पैसे भी अपने पास रखें।



चांद दिखने के बाद इसे करना नहीं भूलें 

 चांद दिखने के बाद इसे करना नहीं भूलें
करवा चौथ 


  1. :- पानी का लोटा और 13 दाने गेहूं के अलग रखें।
  2. :- चंद्रमा के निकलने के बाद छलनी की ओट में पति को देखें और फिर चन्द्रमा को अर्घ्‍य दें।
  3. :- चंद्रमा को अर्घ्‍य देते वक्‍त पति की लंबी उम्र की कामना करें।









करवा चौथ के दिन कब दिखेगा चांद ?


इस दिन आमतौर पर ऐसा होता है कि चांद काफी इंतजार के बाद दिखते है। चांद का दिखना इसलिए भी जरूरी होता है क्योंकि व्रत चांद देखने और अर्ध्य देने के बाद ही पूर्ण होता है। उसके बाद छलनी की ओट से पति को भी देखना होता है। इस बार करवा चौथ की पूजा का मुहूर्त सायंकाल 6:35 से रात 8:00 तक है। अर्घ्य रात 8 बजे के बाद चांद देखने के बाद दिया जा सकता है। चंद्रोदय सायंकाल 7:38 बजे के बाद है वहीं चतुर्थी तिथि का आरंभ 27 अक्टूबर को रात में 07:38 बजे से है। चंद्रोदय यानी चांद के दिखने का समय रात्रि 7 बजकर 55 मिनट पर होगा। ऐसी मान्यता है कि करवा चौथ सुहागिन महिलाओं का प्रमुख व्रत है और जो भी महिला पूरे विधि-विधान से करवा चौथ का व्रत करती है उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।






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